Wednesday, 22 June 2016

हम दिल्ली वालों का दर्द

भई केजरी जी के बारे में सब जानते हैं कि केजरी जी कितने पानी में हैं उन्हें दिल्ली के विकास की कितनी परवाह हैं वो तो मोदी की न चाहते हुए पब्लिसिटी में लगे हुए हैं उन्हें तो सुबह मोदी ’शाम मोदी नजर आता है यदि छींक भी वो लें मोदी का नाम जरूर निकलेगा ‘ अछीछीछी मोदी’ वाह रे दिल्ली के मुर्ख मंत्री जनता ने तुम्हें किसी का गुणगान करने के लिए नहीं जिताया बल्कि काम करने के लिया जिताया है तुम में उसे एक अच्छे आम आदमी की छवि दिखी थी तभी पूरी दिल्ली एकजुट होकर तुम्हारे समर्थन में खड़ी थी लेकिन आज तुम उसी दिल्ली के समर्थन का मजाक बने रहे हो मोदी चालीसा गाकर,
याद करो अपने वादो को जो अन्ना संग बैठ कर रामलीला मैदान से लगाए थे उनमें से शायद ही तुमने कोई वादा पूरा किया हो । जिसका दंभ भर सकते हो । हमने तो तुम्हे राजनीति को बदलने के वास्ते भेजा था । लेकिन तुम ही बदल गए , मुझे याद है कि तुम्ही ने कहा था कि गंदी नाली को साफ करना हो तो नाली में ही उतरना पड़ता है लेकिन तुम तो नाली में ऐसे उतरे कि तुम भी उस नाली का हिस्सा हो गए हो । जिसको साफ करने का कभी तुमने और तुम्हारे साथियों ने वादा किया था ।
सत्ता में आते ही तुमने पहले काम जो किया था वो भी आलोचित था तुमने ही वीवीवी आई पी कल्चर का आगाज किया था । क्या तुम्हें उस समय आपने आपको आम आदमी कहने में शर्म आ रही थी जो तुम ने इस कल्चर को आग दी । तुमने आपन गुरू , मित्रों अपने चाहने वालों से दूरियां बढ़ाई हैं जिसका खामियाजा बाघियों को जन्म देकर करा । मुझे याद है तुमने राजनीत में आने से पहले जनता को लोक लुभावने सपने दिखाया जो हकीकत में दूर की कोड़ी थी लेकिन विश्वास था तुम्हें उन पर की तुम पूरा करोगे और जनता आस लगाकर बैठी थी लेकिन क्या हुआ उन वादों का ये आज किसी से नही छुपा है तुम ही कहते थे कि न मैं गाड़ी लूंगा न मैं बंग्ला लूंगा लेकिन आखिर कार तुम पलटे और सब लिया ।
  सुना है कि अब केजरी राज जी एक तरफा चौबारा सजाने में व्यस्त हैं पंजाब को हाथिया लेना चाहते है अपने उस अंदाज से जिसकी बयानगी कुछ समय पहले दिल्ली में की थी । और कुछ बयानगी 49 दिन की सरकार में कि थी जो मात्र ट्रेलर भी थी । क्या पता था हमें कि फिल्म इतनी स्वार्थ पूर्ण होगी । हर न्यूज चैनल , अखबार , पत्रिकांओं में शर्मदगी का नाटक करते हुए माफी का मैलोडी ड्रामा खूब हिट हुआ केजरी जी दिल्ली ने आपको सर आंखों पर बिठाया लेकिन भ्रम के दिन चार होते हैं और असलियत के दिन हजार होते हैं शायद हम दिल्ली वाले ये भूल गये थे जिन्हें आप अब हमें याद दिला रहे हो ।
  हर बार सुनने में आता है कि केंद्र काम में दखल दे रही है केन्द्र ये कर रही है केन्द्र वो कर रही है लेकिन सच तो ये है की आप ही कुछ नही करना चाहते जो बहुत ही निनदनीयता के साथ साथ दिल्ली के विकास में बाधक है । आपने दिल्ली को रातों रात जो स्वप्न दिखाया थे उनकी हकीकत अब समझ आ रहीं है कि स्वप्न में तोड़े गये चीकू कडैल ही होते है । लेकिन जनता ने वो चीकू तोड़े जिनका स्वाद अब पता चला है । आपने कांग्रेस के पदचिन्हों पर चलते हुए अपने 67 विधायकों का वेतनमान 20 प्रतिशत बढ़ाया लेकिन दिल्ली की जनता जो सुबह काम पर जाती है और रात को लौटती है वो 15-16 हजार प्रतिमाह लेकर उनके लिये आपका कोई दायित्व नहीं बनता । हां आपने बिजली पानी के दाम कम किये क्या इतने भर से ही लोग संतुस्ठ है केजरी जी जनता ने और पार्टियों पर विश्वास करना बंद कर दिया था और आप पर विश्वास जताया था आप दिल्ली को बेहतर राज्य बनायेंगे फिर भारत को लेकिन क्या पता था जब ढोल ही फटा होगा तो बजेगा क्या ?
   केजरीवाल जी मैं छोटा ही सही बात बहुत पत्ते की कहता हूं आप दिल्ली को देखिये बाकि सब को छोड़िये । आप दिल्ली को अच्छा और उन्नत राज्य बनायेंगे तो भारत को भी उन्नत बनायेंगे ।
                     सोहन सिंह

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