कई सालों से खाली पड़ी जमीन अब बच्चों के खेलने का मैदान बन गई है लेकिन कुछ सालों में कालोनी की जिस प्रकार से तरक्की हुई है। उससे तो ऐसा ही लगता है कि अब तो बच्चों के खेलने की जमीन पर कब्जा होना अनिवार्य है और कुछ भू माफियांओं ने अपना कब्जा काबिज भी कर दिया है लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है पंरतू कई सालों से सुनते आ रहे हैं हम कि वो जमीन ग्राम पंचायत की है। लेकिन यकायक इस जमीन के वारिस कहां से पैदा हो गये ये बात हम जैसे लोगों को कचूटती है जिन्होने अभी तक ये जमीन खाली ही देखी थी लेकिन यकायक मलवै का भराव और जमीन को नापने का काम शुरू हो गया जिससे आस पडोस वाले भी हैरान हो गये कि इस जमीन का मलिक आखिर है कौन ? जब इस जमीन के भाव कौड़ियों के थे तब कोई क्यों नहीं अपनी दावेदारी ठौंकने आया अब जब ये जमीन करोड़ों की पुत हो गई तो इसके भी जन्मदाता पैदा हो गये। सरकार तो हमेशा से ही मूक दर्शक रही है जो सिर्फ देखना जानती है इसके सिवाय उस पर कोई काम बचा ही नहीं है अब इस जमीन की फरियाद लेकर कोर्ट में कौन जाये ? ये अहम प्र्श्न है जो हर आदमी के जहन में है लेकिन कोई पहल ही नहीं करना चाहता अगर पहल हो भी जाये तो कोई अपनी जान इन भू माफियों को देना नहीं चाहता
अब सभी इसी इंतजार में हैं कि कब हमसे ये जमीन छिने जो कभी बच्चो के क्रिकेट का मैदान और बारिश के समय में झील में तबदील हो जाया करती थी और बच्चे ही नहीं बड़े भी मछली पकड़ने का आनन्द लेने आया करते थे जो अब कालोनी कटने के बाद कहीं खो जायेगी कुछ समय बाद खुले आसमान का आनन्द लेने वाले बंद गलियों के मुसाफिर हो जायेंगे जिन्हें आसमान के सही नजारे इंडिया गेट पर ही जाकर मिलेगें जिन्हें वो अपनी कालोनी में मिस करेंगे |
लेकिन अहम प्रश्न ये है कि आखिर कब तक खाली पड़ी हुई जमीन पर भू माफिया सक्रिय रहेंगे । एक ओर तो दिल्ली सरकार बड़े बड़े दावे करते थकती नहीं और दूसरी और उनकी नाक के नीचे भू माफिया अपना कारोबार बड़ा रहे हैं तो वाकैय ही शर्म वाली बात है जिसको लेकर दिल्ली सरकार कटघर में साफतौर पर खड़ी है कांग्रेस द्वारा पारित उस कानून को भी ताक पर रख दिया गया है जिसमें कहा गया था कि अब दिल्ली के अंदर कोई भी नई कालोनी बजूद में नहीं आयेगी लेकिन कांग्रेस का राजकाल खत्म होने के बाद उनका वो कानून भी खत्म हो गया जो भू माफियाओं की नाक में नकेल कस रहा था लेकिन अब आम आदमी पार्टी की सरकार में भू माफिया आवार सांड की तरह फिर से लोगों को क्षति पंहुचाने के लिये तैयार है और इन आवारा सांडो के मालिक इंतजार में है कि कब ये सांड आम जनता पर वार करें और हम आम जनता की मरहम पटटी के बहाने उनसे मुंह मांगी कीमत वसूल करें जो आम जनता को हसकर या तो रोकर देनी ही पड़ेगी ।
-सोहन सिंह
No comments:
Post a Comment