भारत विवधताओं से भरा देश है जहाँ पर कई धर्म, कई जाती, कई भाषा, कई परिवेश, कई भेष से प्रेरित लोग रहते हैं जो स्वम् को भारतीय होने पर गर्व करते हैं और एक राष्ट्र, एक धर्म और एक संगठन की सदेव ही अलग तरीकों से पैरवी करते हैं । लेकिन उसके बावजूद भी जब राष्ट्र के सोहाद्र और एकता की बात आती है तो एक ध्वज को सर आंखे रख कर समान देते हैं जिसे हम तिरंगा कहते हैं जो हमारे राष्ट्र हमारी एकता और हमारी विवधताओं को एक कर एक धरातल पर ला खड़ा करता है जिसे परिणाम स्वरूप हम अपने आपको गौरवंविंत समझते हैं हमारे मतभेद , भेदभाव, और जातिगत वेदनाओं भी मिट जाती हैं
सन 31 मार्च 1921 में कांग्रेस अधिवेशन में एक ध्वज होने की बात कही गई जिसकी रूप रेखा को तैयार करने की जिम्मेदारी "पिंगली वैंकया" को सौंपी गई जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश से थे और महात्मा गांधी जी के मित्र थे।
जिन्होंने भारतीय ध्वज को बनाने में 15 वर्ष का समय लिया और इन 15 वर्षों में उन्होंने विश्व के 30 देशों ध्वजों का निरीक्षण किया जिसके बाद 22 जुलाई 1947 में केसरिया और हरे रंग से सुसज्जित ध्वज सामने आया जिसमे महात्मा गांधी ने सफेद रंग के साथ चरखे का प्रावधान दिया । जिसको "स्वराज्य ध्वज" नाम दिया गया।
आजादी से कुछ ही दिन पहले सविधान सभा ने यह तय किया कि हिंदुस्तान में हर धर्म, हर भाषा और सम्प्रदाय के लोग रहते हैं जिसके चलते "स्वराज्य ध्वज" के चिन्ह चरखे को बदल कर अशोक चक्र को अनुमति दे दी गई।
और 15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता के साथ हमारा भारतीय ध्वज का एक नया रूप रंग सामने आया ( जिसमे हरा रंग हरियाली के प्रतीक दिखाया गया , सफेद रंग शांति का प्रतीक दिखाया गया और केसरिया रंग वीरता और पुरषार्थ का प्रतीक दिखाया गया )
जो सम्पूर्ण विश्व के ध्वजों में अग्रिम पंक्ति में दर्ज है।
जिसे सोच कर जिकर हम गौरवान्वित होते है।
जय हिंद, जय भारत।
-सोहन सिंह
Thursday, 3 August 2017
हमारा ध्वज "तिरंगा"
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