तीन तलाक का मुद्दा उठाने को तो कांग्रेस कब का उठा सकती थी लेकिन राजनीतिक पृष्ठभूमि न खिसक जाए के चलते उसने इस मुद्दे को हाथ तक लगाना मुनासिफ न समझा। और अब जब भाजपा ने ये मुद्दा उठाया है तो कांग्रेसी और मुस्लिम सम्प्रदाय के कांग्रेसी मुलवी छाती पीट पीट कर महिलाओं से लड़ रहे हैं , शरिया का हवाला दे रहे हैं और तो और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने तीन तलाक को जरूरी बताया लेकिन वह इस बात से काफी इतफाक नही रखते थे कि मुस्लिम महिलाएं अपने हक को लेकर इतनी आक्रमक और जागरूक होंगी उनकी आंख तब खुली जब एक बड़ा आंदोलन भाजपा के सहयोग के कारण विशालकाय हो गया जिसका संज्ञान सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा ।
सड़क से संसद तक तीन तलाक का मुद्दा छाया रहा इस दौरान इस्लाम के ठेकेदार तीन तलाक के विपक्ष में नज़र आये यहां तक कि वो दी दहाड़े न्यूज़ चैनल की बहसों में महिलाओं को डराने और धमकाने तक का प्रयास करते नज़र आये जो उनके गैरजिम्मेदाराना रवैये के गवाह बना की वो किस हद तक महिलाओं को दबा कर रखना चाहते हैं। मुस्लिम महिलाओं के हौसले को देख कर इस्लाम के ठेकेदार डरे और सहम से गये थे कि कहां से इन औरतों मे इतनी समझ आ गई फिर भी उनको इन्होंने दबाने और आक्रांत करने का भरपूर पर्यतन किया लेकिन महिलाएं सरकार की रणनीति को अपना कर चलती रही और भारत सरकार ने भी मुस्लिम महिलाओं का भरपूर साथ निभाया जिससे कि विश्व वायपी आंदोलन खडा हो सका। जिसका असर मुस्लिम पुरषों पर देखने को मिला जो अपनी दूसरी और तीसरी शादी को लेकर असमंजस में दिखे जिसका सीधा असर महिला समाज से आया था जो एक ऐतिहासिक कदम बन रहा था। कुकर्म,अधर्म ,हलाला, एक विवाह के होते दूसरा तीसरा विवाह पर पांबन्दी का असर मुस्लिम समाज पर आन पड़ा था जिससे पिंड छुड़ाना मुस्लिम समाज के पुरुषों के लिए आसान न था फिर भी उन्होंने महिलाओं को धमकाना आरम्भ रखा जिसका असर ये हुआ कि महिलाए और मुखर होकर इस कुकर्म के खिलाफ लड़ी और अपने अधिकार की आवाज को और तेज़ी दी जिसके संज्ञान में सुप्रीम कोर्ट ने आज 22/08/2017 तीन तलाक को बैन कर के दिया और सरकर को 6 माह का समय भी दिया कानून बनाने के लिए।
-सोहन सिंह
Tuesday, 22 August 2017
अब नही कह पाएंगे मुस्लिम पुरुष तीन बार तलाक़।
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समाजिक
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