आमतौर पर गांव देहात की जनता अपना दुख किसी को नहीं दिखाती लेकिन दुखों के सहारे वह जीना सीख ही लेती है जब कभी बात उनके विकास और तरक्की की आती है तो वो उदासीन से दिखते हैं जैसे कि उन्हें विकास का अर्थ समझ न आ रहा हो । लेकिन ये सच्च है वह विकास की धारा से जुड़ना चाहते हैं और शहरों के साथ कदम से कदम मिलना चाहते हैं पंरतु अभाव मात्र उनकी सोच में ही प्रतीत होता है वह इस ओर कितना संजिदा हैं और इसके विपरीत षहरी करण में ग्रामीण रस बस नहीं पाते और कुछ समय पष्चात् उन्हें ग्रामीण परिवेश में ही लौटना पंसद आता हैं
जहां शिक्षा और रोजगार का अभाव भारत के हर ग्रामीण क्षेत्र में दिखता हैं वही विपरीत दिषा में देखा जाए तो षहरीकरण बहुत तेजी से पैर पसार रहा हैं लेकिन ग्रामीण सभ्यता और परिवेष, बोली रहन-सहन में परिवर्तन आ रहा है जो भारत के ग्रामीणों को आहात करता सा प्रतीत होता है और 21 वीं सदी होने के बावजूद भी भारत के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र अपने को दीनहीन दृश्टि से देखते है जिससे उनमें षिक्षा के आभाव का स्पश्टीकरण होता लेकिन इसके बावजूद भी वो षिक्षा प्राप्त करने में अपनी रूचि स्पश्ट नहीं करते जो ग्रामीणों की साधारण बात हैं यदी भारत सरकार के सर्वेक्षण की बात करें तो ग्रमीण क्षेत्रों में षिक्षा का स्तर पिछले कुछ सालों मे बढ़ा हैं जो भारत सरकार को तस्सली देती हैं लेकिन धरातल स्पश्ट करता हैं कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में षिक्षा का प्रसार तो बढ़ा है लेकिन इस ओर ग्ामीणों का नजरिया उदासीन सा है इसके कई कारण हैं जिनमे सबसे बड़ा कारण हैं बेरोजगारी और खेती-बाड़ी का खत्म होना ।
इस ओर ग्रामीण कहते हैं कि जहां हममें षिक्षा का आभाव है वहीं दूसरी और घटती जमीन और बढ़ती आबादी से बेराजगारी साफ झलकती है हमारे गांव में विद्यालय हैं लेकिन उनमें अवव्यवस्था व्यापत है है कहीं अध्यापक नहीं हैं तो कहीं विद्यार्थी नहीं हैं जिस कारण ग्रामीण बच्चों में अषिक्षका साफतौर पर देखी जा सकती हैं लेकिन सरकार मौक दर्षक बनी बैठी हैं और अपने आंकड़ों को माध्यम बनाकर खुदको बहका रही है लेकिन यहां जमीनी हक्कीकत कुछ ओर हीं है गांवों में मनरेगा के अधीन काम तो दिया जा रहा है लेनिक उसमंे भी हमें ठगा जा रहा है हमें मेहनताना सरकार के मापदंडो के आधार पर नहीं दिया जा रहा है लेकिन फिर भी हम काम कर रहें हैं और तो ओर जब हम आवाज उठाना चाहते हैं तो हमारी आवाज को दबाया जा रहा है
सरकार को ग्रामीण भारत में षिक्षा का स्तर और बेरोजगारी जमीनी मापदंडों को नापने के लिए फिर से सर्वेक्षण कराना और ग्रामीण क्षेत्रों को एक नई रणनीति के तहत षिक्षा और रोजगार के साधनों को बेहतर करना होगा और जहां ग्रामीण क्षेत्रों में षिक्षा को लेकर लोग उदासीन हैं वहां षिक्षा के उच्चतर माध्यम के बारे में ग्रामीणों को बताना होगा तब जा कर भारत का ग्रामीण षिक्षा ग्रहण कर बुद्विमान होगा ।
प्रस्तुति- सोहन सिंह
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