Tuesday, 8 September 2015

अब तो जागो आंख के अंधों

अब भाई हम दलित हैं तो इसमें हमारा क्या कसूर हमें जब देखो तब प्रताड़ना भरी नजरों से देखा जाता है इसमें कोई दो राय नहीं कि हम भी षिक्षा का अधिकार रखते हैं और षिक्षा देना का भी अधिकार रखते हैं फिर न जाने क्यों सभ्य समाज में हमसे वो लोग डरे से दिखते हैं जो स्वंय को समाज का ठेकेदार या यों कहिए कि समाज के भगवान बने बैठे हैं जो अपनी क्षमता और कर्म पर स्वंय ही विष्वास नहीं कर पाते और उसकी भड़ास निकलते हैं हम पर, लेकिन ये चेतावनी उनके लिए अवष्य हैं जो हम दलितों का पूर्व में बहिश्कार करते थे और वर्तमान में भी कर रहे हैं लेकिन अब दौर बदल गया है अब हम पढ़े लिखे और नौकरी पेषा लोग हो गए हैं समाज के ठेकेदारों । हम अपने अधिकार और तुम्हारे अधिकारों में अंतर कर सकते हैं
लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम तुम्हारे छुआ-छूत और बेकार के आंडबर सहेगें क्योंकि हमारे बाबा साहब अम्बेडकर कर नेे हमे सविधान में आरक्षण का प्रावधान दिया हैं और तुम अब उस प्रावधान को बदल देना चाहते हो जिस के कारण तुम अपने आप को हमसे नीचा समझते हो यही कारण है जो तुम्हारे अंदर हमारी वजह से डर पनप रहा है और ये भी सच्च है कि उस डर का कारण तुम खुद ही हो , अगर इतिहास उठा कर देखा जाए तो अन्याय और दुरचार की सीमा तक लांघ दी थी तुमने और अपने आप को सेठ साहुकार और न जाने क्या-क्या समझ बैठे थे और हमें पषु-जानवर की भांति भ्रमित कर हमारा षोशण किया करते थे लेकिन 21वीं षताब्दी हम षुद्रों की बन रहीं है तो उससे क्यों डरे बैठे हो तुम
रोजाना आरक्षण को लेकर तुम जंतर-मंतर और विधान सभा, न्यायपालिका, संसद में बहस कर रहे हो कि आरक्षण खत्म करो, अरे भाई आरक्षण खत्म करने के बाद क्या गांरटी है कि तुम हमारे साथ वफ़ादार रहोगे,,  और आरक्षण से तुम्हारा हम क्या छीन रहे हैं ? जिसको लेकर तुम बौखलाए हुए हो , अरे भाई आरक्षण का 3 प्रतिषत हिस्सा ही तो हमारे हिस्से में आता है बाकि 97 प्रतिषत हिस्सा तो तुम सभ्य सभल और पंडित्य से परिपूर्ण लोगों में आता है फिर भी हमारे हिस्से के 3 प्रतिषत को लेकर इतने फिकर मंद क्यों हो आपने 97 प्रतिषत का लाभ उठाई,,,, क्यों बेवजह रोते हो कि हमें नौकरी नहीं मिलती, ये आरक्षण वाले नौकरी ले जाते हैं हम तो अपने 3 प्रतिषत के हिस्से से नौकरी प्राप्त करते हैं क्योंकि हम में योग्यता हैं आपतो 97 प्रतिषत हिस्से से भी नौकरी नहींपा पाते तो इसका मतलब क्या समझें कि तुम में योग्यता का आभाव है या मानसिक संतुलन का,,,,,
जो 97 प्रतिषत से भी खुष नहीं है और संविधान में आरक्षण को ही खत्म कर देना चाहता हैं और लगाातार इसकी जुगत में लगा  हुआ है लेकिन ये भी सच है लोभी और लोलापसी लोग हो जो स्वंय कुछ नहीं करना चाहते,,,, लेकिन अपने नौकर से उसकी अपेक्षा रखते हैं अरे भाई,,,, नौकर कब तक करेगा ये सब कभी खुद भी तो प्रयास करो,,,,, लेकिन तुम क्यों प्रयास करोगे तुम तो सुद्रण समाज से हो न,,,, अब तो अपनी सोच में परिवर्तन लाओ और जाति पाति को छोड़ समाज की उन्नति की ओर देखो,,,,अरे आंख के अंधो अब तो जागो
                                                                                                 प्रस्तुति- सोहन सिंह

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