जो राष्टहहित की बातें करते है वहीं आज राष्ट में शांति को भंग करने की राजनैतिक बिसातें बिछा रहें है जो भारतीय जनमानस के साथ इसे खेल समझकर खेल रहें हैं वो शायद ये नहीं जानते की जो चिंगारी देता है वही सबसे पहले उस चिंगारी से प्रभावित होता है इसके उपरांत भी राजनैतिक बिसातें बिछाना चाह रहें और जो भारतीय समाज और भारतीय एकता और अंखण्डहता के लिए दुखद है लेकिन सबसे बडा दखद कारण है हमारे अपने लोग, जो राजनैतिक लाभ पाने को लिए हम हिन्दूस्तानियों को सौहार्द्र से दूर रख, अपनी झोली में रानैतिक लाभ लेना चाहतें हैं जिनमें बडे-बडे नामीग्रामी लोग और नेता भी एकछत्र , इस सौहार्द्र को छिन-भिन्न करना चाहतें हैं जिसमें वो कुछ हद तक सफल भी हो गए हैं लेकिन जनमानस इन बातों को समझता है और आज का युवा शिक्षित है वो नहीं चाहता की हमारी संस्क ति, सौहार्द्र , भाई चारा मात्र चाटुकारिता के लिए टूट जाऐं जिसमें लाभ कम और हानि अधिक होगी ।
इसलिए जो हमारी अखंडता और भाई चारें में दरार डालना चाहते है शायद यह उन्हें नहीं पता की भारतीय समाज उनकी इन नीच और गिरी हुइ बिसतों को जानता है और स्वंय ही तुम लोगों का स्वामी है । फिर भी तुम राजनैतिक रोटियां सेकने से बाज नहीं आ रहे ।
इन सब में हम मीडिया वाले भी चाटुकारिता से बाज नहीं आना चाहते, फिर भी हमें समझना होगा ही हम भारतीय राजनिती के चौथे स्तंरभ है जो अशोक स्त भ के समान भारतीय समाज में माना जाता है इसलिए हम चाटुकारिता न कर सत्य का पक्ष समाज के सामने रखें नाकि नेताओं की चाटुकारिताओं का पक्ष ।
जनमत को न उकसाओ नहीं तो सैलाब आ जायेंगा ,
चाटुकारिता से कुछ हासिल न होगा ।
हाथों में दंराति और बैंत आ जाऐगा ,
खंड-खंड बंट जायेंगा मेरा हिन्दुेस्तानन ,
जिसकी शान में आंतक का फरमान आ जाऐगा ,
जनमत को न उकसाओ नहीं तो सैलाब आ जाएगा
सोहन सिंह-
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