राजनीत में सब जायज माना जाता है आरोप प्रत्यारोप के सफल तीर भी चलते है , रस्सा कसी के पल भी होते है , गिरेवान पकड कर धमकाना और धमकी से बस न चले तो अंधेरे में खडे होकर गुंडो से पीटवाना और बाद में कह देना कि ये तो विपक्ष ने किया है ।
एक दूसरे पर घिनौने आरोप प्रत्यारोप , राजनीति में आम आदमी को मुहरा बना कर जाति वादी के माप दंडों को समाज मे डेगूं की बीमारी की तरह तेजी से फैलाना और फिर कहना कि ये तो हमें नीचा दिखाने की विपक्ष की चाल है
आदम आदमी को फाईलों के चक्कर में उलझााकर सालों साल दर दर की ठाेकरें खिलाना और छोटे कर्मचारियों से पेैसे वसूल करा कर बडे अधिकार को देना और उनसे अपना हिस्सा मांग कर, फिर उसी अधिकारी को वो काम करने के लिए कहना यदि वो अधिकारी फसता है तो उसे डरा धमका के अपना पला झडना अगर अधिकारी न डरे तो उसे मौत के घाट उतरवाकर उसके घर वालों को कुछ राशि देकर उन्हें पालने का प्रलोभन भर देना और यदि वो न माने इस राशि से तो उन की भरी बाजार अपने गुडों से कहकर बेज्जती कराना
इन सब बातों के लिए आज की राजनीति जानी जाती है जो अपने सगों को भी नही बकसती नहीं हैं और उसके लिए उनको उसका कत्ल ही क्यों न कराना पडे । ये है राजनीति आज की जिसको जनता पंसद ही नहीं करती ।
क्योंकि राजनीत कुछ गंदे नेताओं न गंदी कर दी है जो अपने राजनीति के कैरियर को चलाने के लिए इन सब हत्थ कंडों को अपनाते हुए हिचकते भीनहीं है और बेकौफ अपने काम को अंजाम देते है जैसे वो ही इस देश के कर्णधार हो गए हों ।
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