कर्णाटक में कल का दिन (बहुमत की गिनती) बहुत खास था कल (15.05.2018) सियासी पारा अपने चर्म पर था जिसके रण में कई उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे जिसमें कांग्रेस (78) के बाद भाजपा (104) को अपना किला फतह करना था जिसके शुरूआती रूझान को देख कर किसी को कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि शुरूवाती रूझानों में कांग्रेस ने बाजी मारी थी जिसके चलते भाजपा पिछड़ गई थी लेकिन जैसे गिनती का दौर बढ़ा तो फिर बाजी भाजपा के हाथ रही जिसके चलते कांग्रेस (78) के हाथ पैरों पर सूजन सी दिखने लगी सभी में हड़बड़ाहट का दौर शुरू हो गया कि ये कैसा गणित बिगड़ा और बड़बोलों के बोल मंद पड़ गए। जिसमें कहीं न कहीं वहां के मतदाताओं ने चेता दिया कि कांग्रेस का अब वह पिंड छोड़ देना चाहते हैं कांग्र्रेस 2013 के मुकाबले 2018 में बेहद दयनीय स्थिति में पंहुच गई है उसे अपने से कम सीटों वाली पार्टी जेडीएस (38) के साथ गठबंधन का एलान समय रहते कर दिया जिसका सीधा असर कांग्रेस की साख पर था जिसे बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने आप से समझौता करते हुए कम सीटों वाली जेडीएस के हाथ कर्णाटक की कमान सौपने का फैसला कर लिया वो भी लिखित में, लेकिन असली गणित तो राज्यपाल को तय करना था।
शाम होते होते उधर भाजपा (104) का भी गणित बिगड़ता दिखा जिसके चलते उसे अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार (112) से वंचित होना पड़ा और अब उसे भी गठबंधन की सरकार बनाने में व्यस्त होना पड़ेगा जिससे दोनों महत्वपूर्ण पार्टियां दोहराव के रास्ते पर आगे बढ़ चली हैं जिसमें कहीं न कहीं कांग्रेस अपनी सरकार बनानी चाहेगी जिससे की उसकी साख पर बट्टा न लगे , जिसकी बयानगी मात्र कर्णाटक के राज्यपाल तय कर सकते हैं
भाजपा के द्वारा बनाई गई रणनीति में कांग्रेस के अनुसूचित जाति सीटों (28) को सेंध लगााकर अपनी ओर करना का श्रेय उनकी चुनाव में बढ़ती सीटें हैं जिनके द्वारा वह 104 सीटें जीतने में कामयाब रही जो भाजपा की रणनीति का एक हिस्सा थी, जिसके चलते सिद्वरम्मैया को उन्हीं की सीट पर हार का समाना करना पड़ा जो पूरी कांग्रेस की कमर तोड़ गया।
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