Thursday, 31 May 2018

आखिकार जीत का ठिकरा गठबंधन सरकार ने वोटिंग मशीनों पर क्यों नहीं फोड़ा।

31 मई को उपचुनावों के नतीजों में गठबंधन सरकार की जीत हुई और भाजपा की हार हुई भाजपा मात्र 2 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी जिससे कैराना सीट को भविष्य की रणनीति माना जा रहा है जिसकी जीत से यह तो पक्का हो गया कि 2019 के चुनावों में गठबंधन सरकार का जीतना लगभग तय है जो कि आने वाली भारतीय राजनीति पर अपना वर्चस्व रखेगा।
कैराना में मिली जीत से गठबंधन की सरकार को यह विश्वास हो चला है कि आने वाले 2019 चुनावों में यह फाॅर्मूला कामयाब होगा जिसका टेªलर उपचुनाव में लाॅच हो गया है लेकिन दूसरी और उपचुनावों में भाजपा गठबंधन सरकार से मात्र कुछ ही वोट के अंतर से हारी है जिससे ये भी पता चलता है कि गठबंधन होने के बाद भी भाजपा को दमखम कम नहीं हुआ है जिसको देखकर गठबंधन की सरकार को अपनी रणनीति की पुर्नविवेचना करनी होगी की कहां पर हम भाजपा से अच्छा कर सकते जिससे की 2019 के चुनावों में भाजपा को हरा सके। यदि गठबंधन सराकर द्वारा अपने रणनीति पर पुर्नविवेचना नही की गई तो 2019 एक बार फिर भाजपा दमखम से अपने पैर पसारेगी जो जिससे गठबंधन की सरकार में लिप्त राहुल, मायावती, अखिलेश, जैसे दिग्गज नेता फिर से वोटिंग मशीन पर अपनी हार का ठिकरा फोड़ते नजर आ सकते है
यदि हम गठबंधन की सरकार की विवेचना करें तो उनकी नजरों में इस बार वोटिंग मशीनों से कोई छेड़छाड़ की वारदात नहीं हुई हां मशीने कुछ खराब जरूर हुई थी जिसमें गठबंधन सरकार ने यहां तक कह दिया था कि यदि गठबंधन की हार हुई तो वोटिंग मशीन में चुनाव आयोग ने गड़बड़ की है लेकिन चुनाव का नतीजा गठबंधन के पक्ष में आया है इसलिये अब वोटिंग मशीनों में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
सबकुछ देखने से तो यही प्रतीत होता है कि हार होती है तो वोटिंग मशीनों को चुनाव आयोग ने पहले से ही भाजपा के पक्ष में कर रखा है अगर जीत होती है तो वोटिंग ही मात्र निष्पक्ष वोटिंग कराने का सहारा है

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