Saturday, 4 May 2013

अखण्‍डता का प्रतीक बने

कभी आजादी मिली थी हमें, पर आज हम आजाद है कहां,पूर्व में राजा महाराजाओं के थे हम गुलाम, फिर हुए मुगलों के गुलाम, उसके बाद में हम रहे अंग्रेजों के गुलाम, पर आज हम आजाद हैं कहां। अब हम हैं इन नेताओं के गुलाम, जो अपनी तानाषाही उन राजा महाराजाओं की तरह कर रहे हैं जो पूर्व में हमने सहा है, ये अग्रजों की उस रणनीति केा कायम कर रहें है जिसके द्वारा उन्होने हमारे उपर पूरे 200 साल राज किया ओर हमें अपना गुलाम बनाए रखा हमने अपने समाज को इस गुलामी से दूर रखने की कोषिष तो बहुत की लेकिन इन्होने हमें उस कोषिष में नाकाम कर दिया ओर हम लोगों मे फूट डालकर हमारी जाति-पाति का उन्हाने भर पूर फायदा उठाया जो वर्तमान में भी हमारे सामने एक बहुत बढ़ी समस्या है जिसका फायदा वर्तमान में ये नेता लोग उठा रहे है हमें जाति धर्म और सम्प्रदायों में बांटकर, वर्तमान में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो इस कुकर्म से दो चार न हुआ हो, परंतु आज भी हम इस जाति पाति से बाहर नहीं निकल पाए हैं कुछ दबदबे वाले व्यक्ति अपना दबदबा बनाने के लिए हमारी इस लाईलाज बिमारी का फायदा उठाकर उसमें ओर भी इजाफ कर रहे हैं,पंरतू एक बात यहां पर सत्य हैं आज की युवा पीढ़ी इन बातों को समझ रही है ओर दबे स्वर में उनके ह्रद्रय में वो आग जल रही है जो कभी ज्योतिबा फूले जी और डॉ अम्बेडकर के ह्रद्रय में जल रही थी, बषर्ते यह आग हर युवा के ह्रद्रय में जल रही है या कुछ ही युवाओं के ह्रद्रय मंे जल रही है, वर्तमान के युवाओ के विचारों को सुनकर ओर उनके विचारों को परख कर लगता तो ऐसा है कि ये आग हर किसी के ह्रद्रय में जल रही है परंतु पुरानी पीढ़ी इस बात को पचा नहीं पा रही है ओर अपना दबदबा कायम करने के लिये भरसक प्रयास कर रही है लेकिन इस मुददे पर राजनैतिक पार्टीयां भरपूर हाथ सेक रही हैं ओर जाति-पाति के नाम पर हम लोगों में वो बीज बो रही है जिसकी फसल सालों से कुछ दंबग लोग काटते आ रहे 
लेकिन अब समय आ गया है कि हम इस कमजोरी का फायदा किसी भी राजनैतिक पार्टी ओर उन दंबगों को नहीं उठाने दें जिन्होने हमेषा हमारी जाति पाति और धर्म को आड़े लाकर हमेषा हम ललकारा है ओर हमें हमेषा आपस में लड़वाया है। हमें एक जुट होकर अपनी युवा षक्ति का प्रर्दषन करना होगा जो सही मायनों में हमारी एकता और अंखण्डता का प्रतीक बने।

सोहन सिंह

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