Tuesday, 7 May 2013

वंशवाद से देश लूटा,

भारतीय राजनीति एक ऐसा पडाव जो किसी राजनेता का कैरियर  बना देती है, (बेशक घोटालों से ही सही) लेकिन ये सौ फीसदी सच है कि आज का आम आदमी राजनीति से दूर हैं क्‍योकि वो इस दलदल में जाना नहीं चाहताा इसलिए राजनीति का मापदंड बदल गया है जिसमें सिर्फ वंशवाद रह गया है जो अपने इस परिद्रश्‍य को सिर्फ अपनी बपौती समझ रहा है जो इस राजनीति को चलाने की और, इसमें पैंठ बनाने की निरंतर कोशिश में है लेकिन आम जन जो इस राज‍नीति को हर दिन गाली देता हैं वो ये नहीं सोचता कि, हम ही वो लोग हैं जिनके कारण ये राजनेता चुनकर इस राजनीति में आते हैं वो ये नहीं सोचते कि  इस राजनीति को बदलना है तो हमें एक ऐसी पार्टी का चुनाव करना होगा जो केवल देश ओर देश के बारे में सोचे ा        लेकिन भारत की जनता अच्‍छी पार्टी को चुनना ही नहीं चाहती है उन्‍हें  आज हर पार्टी में वो ही भ्रष्‍ट नेताओं कि छवी दिखती है जो  उन चंद पार्टीयों ने बनाई, जिसके कारण हमारे भारत को एक ऐसी  पार्टी जरूरत है जो एक अच्‍छी छवी वाली हो      लेकिन भारतीय राजनीति के मापदंड सिर्फ कुछ पार्टीयों में ही सिमटकर रह गए हैं जो राजनीति को अपने मापदंड के हिसाब से चलाते है जो वंशवाद फैलाने का काम कर रहे हैं यही कारण है कि हमारा देश इस वंशवाद के कारण लूट रहा है और वंशवादी लोग उसे दबाकर लूट रहे हैं ओर अपने चाचा ताउओं को भी इसमे शामिल कर हैं इसका हाल ही में उदाहरण पवन बंसल का भंजा है           

      अब हम लोगों को ही तय करना होगा कि किस  पार्टी को अपना किमती वोट देना है या इस वंशवाद से ग्रसित पार्टी को देना है या किसी नई पार्टी को इस बार मौका देना है

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