भारत ही दुनिया का एक ऐसा देश है जो संस्कृती औार अपनी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्व है लकिन ये विश्व के स्तर पर ही प्रसिद्वि पाए हुए है लेकिन भारत में क्या ये पौराणिक कथाए और यहां कि संस्कृती बची हुई है ये एक ऐसा प्रश्न है जो अपने आप में ही खास है खास इसलिए है क्योंकि आज हमारी संस्कृती को बाहरी फैशन और ट्रैड डस रहा है आज के युवा इस ट्रैड को अपना रहे है और अपनी उस संस्कृती को भूले जा रहे है जो हमारी कभी पहचान हुआ करती थी लेकिन अब नई युवा पीढी् जो अपने आप को आधुनिक युग से अपने आप को जोडृकर चल रही है वो अपने उन मूल पंरपराओं और उन दंत कथाओं को भूल गए हैं जिन्हें कभी उनकी दादी नानी सुनाया करती थी लेकिन अब जिन्दगी इस कदर बदल गई है कि युवा पीढी के पास अब समय ही नहीं बचा अपनी दादी नानी के उन कहानियों के लिए जिन्हें वे कभी बढे् चाव से अपने पोता पोती को सुनाया करती थी आज के युवाओं का कहना है समय की यही मांग हैं कि हम अपने पुराने रीति रिवाजों को बदल कर नई चीजों को अपनी जिन्दगी में अपनाए ओर उनमें ही रमं जाए जो हमे आत्म संतुष्टि देगी और नए ज्ञान से जोडेगी लेकिन वे इस बात को नकारते दिखे जो हमारी संस्कृती के मूल में बसे हुए है जो हमारी संस्कृती का एक अलग मुल्य को प्रद्वशित करते है वो मुल्य है त्याग और आत्मीयता ा आज हर व्यक्ति अपने लिए ही जी रहा है उसे किसी दूसरे से कोई सारोकार नहीं वो मा्त्र अपना ओर अपनों के लिये ही सोचता है जो हमारे समाज के उस अंग को ढेंगा दिखाता है जिसे कभी वो अपना समझा करता था लेकिन इस भाग दौड् की इस दुनिया में वो अपने भारतीय संस्कृति को भूल गया है जिसने उसे मानव बनाया जिसने उसे खडा् होना सिखाया उस मां को वो नकारता है कहता है कि मैं इस मां को छोड, दूसरी मां को अपनाउंगाा अर्थात दूसरे देश जा कर वही बस जाउंगाा उसी मां कि हर वो बात अपनाउगा जो वो मुझे वो सिखाएगी ा और भारत का युवा अच्छे मौके तलाशने के चक्कर में विदेशों को चले जा रहे है और वही पर बस रहे है जो हमारी संस्कृती के लिए नकारात्मक पहलू है लेकिन कुछ युवा ऐसे भी है जो अपनी संस्कृति और अपनी पौराणिक कथाओं को देश विदेश में सुनाते है और उन्हें उन देशों के लोगों को अपनाने के लिये भी कहते है जिससे हमारी संस्कृति विदेशों में तो फल फूल रही है लेकिन जिस देश में वो जवान हुई उसी देश ने उसे बेगाना कर दियाा और इस देश का दुरभाग्य है जो अपने मुल्यों को बचा भी नहीं पा रहा
इसलिए हम युवाओं को ये समझना होगा कि ये संस्कृति हमारी है और हम इसके ा इसको बचाने का जिम्मा हम युवाओं को ही लेना होगा तभी जाकर कहीं हम अपनी संस्कृति को बचा पांए
इसलिए हम युवाओं को ये समझना होगा कि ये संस्कृति हमारी है और हम इसके ा इसको बचाने का जिम्मा हम युवाओं को ही लेना होगा तभी जाकर कहीं हम अपनी संस्कृति को बचा पांए
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