Friday, 24 May 2013

संस्‍कृति

भारत ही दुनिया का एक ऐसा देश है जो संस्‍कृती औार अपनी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्व है लकिन ये विश्‍व के स्‍तर पर ही प्रसिद्वि पाए हुए है लेकिन भारत में क्‍या ये पौराणिक कथाए और यहां कि संस्‍कृती बची हुई है ये एक ऐसा प्रश्‍न है जो अपने आप में ही खास है खास इसलिए है क्‍योंकि  आज हमारी संस्‍कृती को बाहरी फैशन और ट्रैड डस रहा है आज के युवा इस ट्रैड को अपना रहे है और अपनी उस संस्‍कृती को भूले जा रहे है जो हमारी कभी पहचान हुआ करती थी लेकिन अब नई युवा पीढी् जो अपने आप को आधुनिक युग से अपने आप को जोडृकर चल रही है वो अपने  उन मूल पंरपराओं और उन दंत कथाओं को भूल गए हैं जिन्‍हें कभी उनकी दादी नानी सुनाया करती थी लेकिन अब जिन्‍दगी इस कदर बदल गई है कि युवा पीढी के पास अब समय ही नहीं बचा अपनी दादी नानी के उन कहानियों के लिए जिन्‍हें वे कभी बढे् चाव से अपने पोता पो‍ती को सुनाया करती थी आज के युवाओं का कहना है समय की यही मांग हैं कि हम अपने पुराने रीति रिवाजों को बदल कर नई चीजों को अपनी जिन्‍दगी में अपनाए ओर उनमें ही रमं जाए जो हमे आत्‍म संतुष्टि देगी और नए ज्ञान से जोडेगी लेकिन वे इस बात को नकारते दिखे जो हमारी संस्‍कृती के मूल में बसे हुए है जो हमारी संस्‍कृती का एक अलग मुल्‍य को प्रद्वशित करते है वो मुल्‍य है त्‍याग और आत्‍मीयता ा आज हर व्‍यक्ति अपने लिए ही जी रहा है उसे किसी दूसरे से कोई सारोकार नहीं वो मा्त्र अपना ओर अपनों के लिये ही सोचता है जो हमारे समाज के उस अंग को ढेंगा दिखाता है जिसे कभी वो अपना समझा करता था लेकिन इस भाग दौड् की इस दुनिया में वो अपने भारतीय संस्‍कृति को भूल गया है जिसने उसे मानव बनाया जिसने उसे खडा् होना सिखाया  उस मां को वो नकारता है कहता है कि मैं इस मां को छोड, दूसरी मां को अपनाउंगाा अर्थात दूसरे देश जा कर वही बस जाउंगाा उसी मां कि हर वो बात अपनाउगा जो वो मुझे वो सिखाएगी ा और भारत का युवा अच्‍छे मौके तलाशने के चक्‍कर में विदेशों को चले जा रहे है और वही पर बस  रहे है जो हमारी संस्‍कृती के लिए नकारात्‍मक पहलू है लेकिन कुछ युवा ऐसे भी है जो अपनी संस्‍कृति और अपनी पौराणिक कथाओं को देश विदेश में सुनाते है और उन्‍हें उन देशों के लोगों को अपनाने के लिये भी कहते है जिससे हमारी संस्‍कृति विदेशों में तो फल फूल रही है लेकिन जिस देश में वो जवान हुई उसी देश ने उसे बेगाना कर दियाा और इस देश का दुरभाग्‍य है जो अपने मुल्‍यों को बचा भी नहीं पा रहा
       इसलिए हम युवाओं को ये समझना होगा कि ये संस्‍कृति हमारी है और हम इसके ा इसको बचाने का जिम्‍मा हम युवाओं को ही लेना होगा तभी जाकर कहीं हम अपनी संस्‍कृति को बचा पांए

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